मांग दिवसः राजस्थान पत्रकार परिषद की ओऱ से 2 अक्टूबर, 2026 को मांग दिवस मनाया गया। इस दौरान राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन भी दिया गया।

पत्रकारों का राष्ट्रव्यापी मांग दिवस कार्यक्रम : जयपुर में पत्रकारों ने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के नाम जिला कलेक्टर को सौंपा मांग पत्र

मीडिया आयोग के गठन, पत्रकार सुरक्षा कानून और नए वेज बोर्ड की मांग; राजस्थान पत्रकार परिषद ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

जयपुर।  पत्रकारों की देश में सबसे बड़ी इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन (IJU) के आव्हान  पर महात्मा गांधी की जयंती के मौके पर  2 अक्टूबर, 2026, शुक्रवार को देशभर में पत्रकार संगठनों द्वारा राष्ट्रव्यापी मांग दिवस मनाया गया है। इस कड़ी में प्रदेश की पत्रकार यूनियन राजस्थान पत्रकार परिषद के बैनर तले जयपुर के पत्रकारों ने प्रदेश के सभी पत्रकारों की मुख्य समस्याओं , माँगो और सुविधाओं के लिए बिरला ऑडिटोरियम के महाराज कैफे में बैठक के बाद  पत्रकारों की मांगों का ज्ञापन राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के नाम से जयपुर जिला कलेक्टर को सौंपा गया। इस दौरान परिषद के प्रदेश अध्यक्ष रोहित कुमार सोनी, कार्यकारी अध्यक्ष गिरिराज अग्रवाल, महासचिव रमेश यादव सहित अन्य पदाधिकारी और जयपुर के पत्रकार मौजूद रहे। इस मौके पर प्रदेश के पत्रकारों की समस्याओं, मांगों को लेकर चर्चा के बाद स्थानीय स्तर पर दस सूत्री मांग पत्र तैयार किया गया। जिसे जल्द राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भी आगामी एक -दो दिन में दिया जाएगा।

राष्ट्रपति को दिए ज्ञापन की प्रमुख मांगें: 

नए मीडिया आयोग का गठन:

ज्ञापन में देश में बदलते मीडिया परिदृश्य को देखते हुए एक व्यापक नए मीडिया आयोग के गठन की मांग की गई है। इसमें 24×7 न्यूज चैनलों, डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया के विस्तार के बाद पैदा हुई नियामकीय, तकनीकी और नैतिक चुनौतियों की समग्र समीक्षा करने की आवश्यकता बताई गई है।

पत्रकार सुरक्षा के लिए केंद्रीय कानून:

पत्रकारों पर हमलों, हिरासत, ऑनलाइन उत्पीड़न और संस्थागत दबाव जैसी घटनाओं का हवाला देते हुए पत्रकारों और मीडिया प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए विशेष केंद्रीय कानून बनाने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि पत्रकारों को बिना भय के अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए।

वैधानिक अधिकार बहाल करने की मांग:

ज्ञापन में कामकाजी पत्रकार एवं अन्य समाचार-पत्र कर्मचारी (सेवा की शर्तें) तथा विविध प्रावधान अधिनियम, 1955 और कामकाजी पत्रकार (वेतन दरों का निर्धारण) अधिनियम, 1958 से जुड़े विशेष प्रावधानों को बहाल करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि नए श्रम कानूनों में पत्रकारों की विशिष्ट कार्य परिस्थितियों और आवश्यक सुरक्षा उपायों को पर्याप्त महत्व नहीं मिला है।

नए वेतन बोर्ड का गठन:

मीडिया कर्मचारियों के लिए नए वेतन बोर्ड के गठन की भी मांग की गई है। ज्ञापन के अनुसार, पत्रकारों और गैर-पत्रकार कर्मचारियों के लिए अंतिम वैधानिक वेतन बोर्ड मजीठिया वेतन बोर्ड था, जिसका गठन 2007 में हुआ था। संगठन ने प्रिंट, ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मीडिया कर्मचारियों को शामिल करते हुए नया वेतन बोर्ड गठित करने की मांग की है।