जयपुर। नई दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश के विभिन्न शहरों में चल रहे छात्र प्रदर्शनों के दौरान कवरेज कर रहे पत्रकारों, रिपोर्टरों और वीडियो जर्नलिस्टों पर हुए जानलेवा हमलों, बदतमीजी, अभद्रता और धमकियों पर राजस्थान पत्रकार परिषद ने गहरा आक्रोश और कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन (IJU) के राष्ट्रीय आह्वान का समर्थन करते हुए पत्रकार परिषद ने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष पत्रकारिता पर इस तरह के हमले लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार हैं।
राजस्थान पत्रकार परिषद ने बयान जारी कर कहा कि एक तरफ जहां प्रदर्शनकारियों द्वारा पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की और बदसलूकी की जा रही है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षाकर्मियों द्वारा शौक बैटन, पैलेट गन और अत्यधिक बल प्रयोग की खबरें भी बेहद चिंताजनक हैं।
विशेष रूप से रैपिड एक्शन फोर्स और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा बिना नेम बैज के ड्यूटी करने और अपनी पहचान छिपाने पर परिषद ने कड़ा ऐतराज जताया है। परिषद का कहना है कि अपनी पहचान छिपाकर पत्रकारों व मीडियाकर्मियों पर कार्रवाई करना स्थापित प्रशासनिक नियमों और जवाबदेही का सीधा उल्लंघन है।
पत्रकार परिषद ने प्रदर्शनकारियों से अपील करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी समाचार चैनल या मीडिया संस्थान की संपादकीय नीतियां प्रबंधन और संपादकों द्वारा तय की जाती हैं, न कि जमीन पर उतरी ग्राउंड टीम या कैमरामैन द्वारा। किसी विशेष चैनल या मीडिया हाउस के रुख से असहमत होकर ऑन-ड्यूटी पत्रकारों को चुन-चुनकर निशाना बनाना, उनके साथ मारपीट या अभद्रता करना पूरी तरह से गैर-कानूनी व अन्यायपूर्ण है।
राजस्थान पत्रकार परिषद मांग करती है कि दिल्ली पुलिस व संबंधित प्रशासनिक तंत्र द्वारा पत्रकारों पर किए गए इन हमलों की तत्काल निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए। दोषी पुलिसकर्मियों एवं मीडियाकर्मियों से बदसलूकी करने वाले उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में पत्रकार सुरक्षा के साथ अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।